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सकूरा ( cherry blossom)


सर्दियों का मौसम जब खत्म होने को होता है, लगभग फरवरी और मार्च में सूरत (गुजरात का एक शहर) की सड़कों के किनारे सकूरा ( cherry blossom) के पेड़ों पर , गुलाबी रंग के अनगिनत फूल मन को मंत्र-मुग्ध करने वाला दृश्य बना देते हैं। मैंने कहीं पढ़ा था इन फूलों का महत्व जापान में बहुत ज्यादा है ये फुल नई शुरुआत और प्यार का प्रतीक माने जाते हैं मेरे मन को ये कुदरती सुंदरता से भर देते हैं ।

चंद पंक्तियां इन खूबसूरत बसंत के फूलों के लिए-


मैंने सकूरा से पूछा- कि पूरे साल कहां चले जाते हो!

गुलाबी रंगों मे डुबे सुंदर फूलों को

क्यों नहीं पूरे साल पेड़ों पर उगाते हो !

क्यों पूरे साल इंतजार करते हो !

क्यों ना सदाबहार बन जाओ तुम !

सकुरा ने कहा-

पूरे साल रहता है काम मुझको

बसंत में आता हूं

नई शुरुआत का पैगाम लेकर

गर्मियों की तपिश में तपकर

संघर्षों को जड़ों में भरता हूं

जटिल हालातो में भी हौशला रखता हूँ।

फिर बारिश आती है धरती जब तृप्त हो जाती है

जड़ो को पोषण देकर नई शाखाएं गढ़ता हुं

बारिश की तेज हवाओं मे गुनगुनाता हूँ

पतझड़ में झड़ जाते हैं जब पत्ते

तब आने की तैयारी में होता हूं


पूरे साल जो रहते हैं-

'सदाबहार' कहलाते हैं

मैं मौसमी ( seasonal ) रंग हूं

मौसमी रंग तो अपने मौसम में ही आते हैं

मैं प्यार का वो शुरुआती रिश्ता हूं….

मैं प्यार का वो शुरुआती किस्सा हूं…

जो अधपक्के से रिश्ते को खूबसूरत बनाता है

जो फल की यात्रा तय नहीं करता

फूलो को बिखेरकर धरती पर

कहीं खो जाता है ।

मैं हर साल ही आऊंगा

तुम तुम्हारे भीतर के प्यार को

थोड़ा-सा अधपक्का रखना

नासमझ रखना…

मैं फिर से तुम्हारे मन में

नए प्यार की तरह गुदगुदाऊंगा

पुराने में भी नए का एहसास कराऊंगा

पर , हां... मौसमी हूं अपने मौसम में ही आऊंगा

विश्वास रखना, मैं यही हूं

फिर आऊंगा !

रुचि हर्ष


 
 
 

2 Comments


बहुत उम्दा शब्द, आनंद आया लिखते रहिए । सूरत की सीरत हर मौसम में नई होती है

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बहुत-बहुत धन्यवाद

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