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उम्र !!

बचपन और सवाल

एक दिन अचानक मेरे छोटे बेटे के भीतर की जिज्ञासा ने मुझसे पूछा- ‘मम्मी एक इंसान की उम्र कितनी होती है’? मैं कुछ व्यस्त थी जैसे कि हर मां एक चींटी की तरह व्यस्त ही रहती है, मैंने बचपन के मुंह से निकले इस सवाल को रफा-दफा करने के लिए कहां depend करताहै उसका lifestyle कैसा है, अपनी सेहत का कितना ध्यान रखता है, कितना जंक फूड खाता है .. ये जवाब शायद मेरा दिमाग इसलिए दे रहा था क्योंकि जवाब की आड़ में मैं उसे कुछ सीखना चाह रही थी।

पर शायद उसके सवाल के पीछे कुछ और छिपा था उसने फिर से पूछा मम्मी बड़े नानू की उम्र कितनी थी? क्योंकि अक्सर वो मेरी जुबान पर मेरे बाबा का जिक्र सुनता रहता है उनका प्रभाव मेरे दिल पर तो है ही मेरी जिंदगी में, मेरी आदतों में भी दिखाई देता है ।

उसके इस सवाल से मेरा मन और मेरा दिमाग दोनों सोचने और महसूस करने के लिए मजबूर हो गए।

मैंने गहरी सांस ली क्योंकि मैं हमेशा महसूस करती हूं कि वो मेरे अंदर अभी भी जिंदा है ,मैंने एक पल के बाद उसके मासूम चेहरे को देखकर उसके बालों में अपनी उंगलियां पीरोते हुए जवाब दिया- ‘लगभग 164 साल तब तो वो जिंदा रहेंगे ही’ उसने आश्चर्य से पूछा- ‘पर वो तो है ही नहीं’?

मैंने कहा- ‘सुन 84 years तक तो वो अपने शरीर के अंदर ही जिंदा थे , लगभग 80 वर्ष तक वो मेरे शरीर मे

जो दिल है उसमें जिंदा रहेंगे क्योंकि 80 साल से पहले मरने का मेरा कोई mood नहीं है, और बाकी मस्ती करते हुए मैंने कहा -मुझे लगता है वो तेरे अंदर भी जिंदा रहेंगे क्योंकि उनकी कहानियों से और हमारे अंदर जो DNA है उससे भी तो तु जुड़ा हुआ है ना !


पता नहीं उसके मासूम मन को कितना समझ में आया पर उसके सवाल ने मुझे जवाब ढूंढने के लिए मजबूर कर दिया जिसे ढूंढते हुए मुझे सुकून मिला, मन में विश्वास और भर गया की जिनसे हम प्यार करते हैं वो कहीं नहीं जाते ।


रुचि हर्ष

लेखक और लाइफ कोच

 
 
 

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